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जिला बिलासपुर के पंजाब सीमा के साथ लगते गुरू का लाहौर में दो दिवसीय बसंत पंचमी मेला धुमधाम से हुआ संपन।

संवाददाता / प्रदीप चंदेल

हिमाचल प्रदेश के जिला बिलासपुर में गुरु का लाहौर में दो दिवसीय बसंत पंचमी मेला बड़ी धूमधाम से संपन्न हो गया मेला के दौरान गुरुद्वारा साहब में दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही हिमाचल प्रदेश सरकार के दिशा-निर्देशों से पुलिस और प्रशासन के द्वारा मेला के दौरान पुख्ता बंदोबस्त किए गए ।इस बसंत पंचमी मेला में जहां पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु पंजाब हिमाचल हरियाणा दिल्ली और अन्य प्रदेशों से दर्शनों के लिए पहुंचे वहीं पर इस दौरान दशमेश  गुरु गोविंद सिंह जी के विवाह उत्सव के उपलक्ष्य पर यह बसंत पंचमी मेला मनाया जाता है
गुरुद्वारा सेहरा साहब से गुरु महाराज की बारात शोभायात्रा के रूप में पांच प्यारों की अगुवाई में चलती है और यह बारात  गुरु का लाहौर में पहुंचती है  जहां पर गुरु महाराज के लावा फेरे किए जाते हैं।गुरुद्वारा सेहरा साहब वह स्थान है जहां पर गुरु महाराज की सेहरा बंदी हुई थी और गुरु का लाहौर और वह स्थान है जहां पर गुरु महाराज के लावा फेरे हुए थे यह दोनों स्थान जिला बिलासपुर के बस्सी क्षेत्र में पड़ते हैं।कहा जाता है कि जब पाकिस्तान के लाहौर में हालात ठीक नहीं थे तो गुरु गोविंद सिंह जी ने माता जीत कौर के मायके वालों को यहीं बुला लिया था और यहां जिला बिलासपुर के गुरु का लाहौर में विधिवत रूप से सिखों के दसवें गुरु गुरु गोविंद सिंह जी का विवाह उत्सव धूमधाम से संपन्न हुआ।

हालांकि इस गांव का नाम पहले खड़ानाला था लेकिन बाद में इसे गुरु का लाहौर के नाम से गुरु गोविंद सिंह जी महाराज ने इसका नामकरण किया और बसंत पंचमी के उपलक्ष्य पर हर वर्ष गुरु गोविंद सिंह के विवाह उत्सव पर यहां पर बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है भंडारों का आयोजन किया जाता है मिठाइयां बांटी जाती है आतिशबाजी का आयोजन किया जाता है और गुरु महाराज का धार्मिक स्थल श्रद्धालुओं की अपार आस्था का केंद्र है।

By himachalpradeshlive

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